ग्रामीण भारत की बदहाली और आर्थिक विकास का लालीपॉप

शिरीष खरे भारत में ग्रामीण और शहरी अंचल के लिए निर्धनता का निर्धारण अलग-अलग तरह से होता है। एक आंकड़े

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गांव की आर्थिक-सामाजिक बुनावट में कितना बदलाव

शिरीष खरे गांव क्या है? अवधारणाओं में जब भी इसे ढूंढ़ने-समझने की कोशिश की तो इससे जुड़ी व्याख्याओं में मुख्य

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मेलघाट में भूख से मरते बच्चे और 90 के दशक का सन्नाटा

शिरीष खरे शिरीष खरे की बतौर पत्रकार यात्रा की ये तीसरी किस्त है। मेलघाट से लौटते हुए ट्रेन में उनकी

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पत्रकार के लिए हत्या की धमकी ही सबसे बड़ी चुनौती नहीं होती

शिरीष खरे ट्रेन की सामान्य गति से मुंबई की ओर लौटते हुए मेलघाट में जो घटा उसके बारे में सोच

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