समाजवादी संग्राम की ‘अमर’ कथा

समाजवादी संग्राम की ‘अमर’ कथा

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अरुण प्रकाश

यूपी में मुलायम परिवार में पांच दिन तक चले समाजवादी संग्राम फिलहाल विराम लग गया है। पार्टी सुप्रीमो की दखल के बाद अखिलेश ‘मुलायम’ हो गए तो शिवपाल का ‘अमर’ प्रेम कमजोर पड़ गया । हर तरफ इस बात की चर्चा होने लगी कि चाचा जीता या भतीजा । किसी ने कहा अखिलेश कमजोर पड़ गए तो किसी ने कहा अखिलेश की हार हुई, लेकिन पांच दिन के संग्राम पर बारीकी से नज़र दौड़ाएं तो तस्वीर का दूसरा रूख कुछ साफ हो जाएगा।

विलेन के तौर पर चर्चा तीसरे व्यक्ति की हो रही है। कहा जा रहा है कि इसी तीसरे व्यक्ति ने चाचा को भड़काया, जिसके बाद ये सारा विवाद खड़ा हुआ । लड़ाई की शुरुआत तब हुई जब अखिलेश ने मुख्य सचिव पद से सिंघल को हटाया । आखिरी इसकी क्या जरूरत आन पड़ी जबकि महीने भर पहले ही दीपक सिंघल को ये जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सूत्रों की माने तो मुख्य सचिव के जरिए शिवपाल अपने उस प्रोजेक्ट को बिना रोकटोक पास कराने की फिराक में थे जिसके लिए अखिलेश ने इंकार कर दिया था। लिहाजा मुलायम सिंह दरबार से दबाव बनाकर शिवपाल ने दीपक को मुख्य सचिव बनवा दिया।

shivpal-yadavउधर, अखिलेश ने शिवपाल से साफ कर दिया कि वो  बलिया एक्सप्रेस वे पर कोई दाग लगने नहीं देना चाहते इस लिए वो मोह-माया छोड़ दें, लेकिन शिवपाल अड़े रहे । लिहाजा अखिलेश को मुख्य सचिव को हटाने का फैसला करना पड़ा, क्योंकि शिवपाल जिस कंपनी को बलिया एक्सप्रेस वे का ठेका देना चाहते थे वो अखिलेश को पसंद नहीं। साथ ही अखिलेश को डर था कि वो कंपनी भरोसे की न होने की वजह से कोई घोटाला भी हो सकता है लिहाजा उन्होंने शिवपाल के सभी रास्ते बंद कर दिये ।

अब आपको बताते हैं कि वो कंपनी किसकी है और शिवपाल को इतनी पसंद क्यों थी । दरअसल वो कंपनी देश की एक जानी मानी मीडिया हस्ती की है। अमर सिंह का उनसे करीबी रिश्ता भी है ।सूत्रों के मुताबिक शिवपाल एक्सप्रेस-वे का पूरा ठेका उसी कंपनी को देने का फैसला कर चुके थे जिसका विरोध अखिलेश ने किया। शिवपाल समझ गए कि वो अपने फैसले को लागू नहीं करा पाएंगे तो उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय पर दखल बनाने के लिए अपने पसंद का मुख्य सचिव बैठा दिया। अखिलेश ये बात अच्छी तरह जानते थे कि अगर वो मुख्य सचिव को छेड़ेंगे तो शिवपाल जरूर कोई हरकत करेंगे।

और हुआ वही जैसे ही मुख्य सचिव हटाए गए शिवपाल मुलायम सिंह से कहकर खुद प्रदेश पार्टी अध्यक्ष बन बैठे । बस अखिलेश को मौका मिल गया उन्होंने फौरन शिवपाल से PWD मंत्रालय छीन लिया । हालांकि दूसरे विभाग तो इस लिए छीने गए क्योंकि अखिलेश जानते थे कि उन्हें पिता के आगे झुकना पड़ सकता है लिहाजा उन्होंने इसकी तैयारी पहले से कर ली और पीडब्यूडी समेत तमाम मंत्रालय छीन लिए ताकि जब लौटाने की बारी आये तो PWD छोड़ सभी लौटा दिए जाएं ।

अखिलेश ने क्या खोया क्या पाया ?

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आखिर में खूब हो हल्ला मचा और हुआ वही जो अखिलेश चाहते थे। ना तो सिंघल की वापसी हई और ना ही शिवपाल को PWD मिला। हालांकि इस बीच अखिलेश को पार्टी अध्यक्ष  का पद गंवाना पड़ा लेकिन वो मुलायम सिंह से ये भरोसा लेने में कामयाब हो गए कि टिकटों का बंटवारा बिना उनकी नजर से गुजरे नहीं होगा। मुलायम ने उन्हें राज्य संसदीय बोर्ड का मुखिया भी बना दिया।

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अरुण प्रकाश। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय। 

 

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