‘एसिड वाली लड़की’ ने कुछ कहा है, तुमने पढ़ा क्या?

‘एसिड वाली लड़की’ ने कुछ कहा है, तुमने पढ़ा क्या?

सत्येंद्र कुमार यादव 

प्रतिभा ज्योति की किताब 'एसिड वाली लड़की' के विमोचन कार्यक्रम की तस्वीर । मेनका गांधी, नजमा हेपतुल्ला ने किया विमोचन ।
प्रतिभा ज्योति की किताब ‘एसिड वाली लड़की’ के विमोचन कार्यक्रम की तस्वीर । मेनका गांधी, नजमा हेपतुल्ला ने किया विमोचन ।

7 अक्टूबर 2016 की वो शाम, ‘एसिड वाली लड़की’ को देखा, सुना और उनके दर्द को महसूस किया। टीवी, अखबारों के जरिए खबरें आती रहती हैं। कुछ ब्रेकिंग न्यूज तक सिमट कर रह जाती हैं। कुछ के दर्द को मीडिया में दो-चार दिन तक दिखाया या लिखा जाता है। टीवी पत्रकारिता से जुड़े हम जैसे शिफ्टों में अपनी जिंदगी जीने वाले ऐसे मामलों पर या तो दोस्तों के साथ चर्चा कर लेते हैं या फेसबुक, ट्विटर आदि पर लिखकर उस ‘किस्से’ को भूल जाते हैं। थोड़ी देर तक दर्द छलकता है। आरोपी को उम्र कैद या फांसी की सजा देने का ‘शोर’ मचता है। फिर वही दिनचर्या।

पत्रकार प्रतिभा ज्योति की किताब ‘एसिड वाली लड़की’ के विमोचन कार्यक्रम में उन लड़कियों को करीब से देखा, जिन पर सनकी लोगों ने अपनी सनक की वजह से तेजाब फेंक दिया था। उनके दर्द को सुना, प्रतिभा ज्योति की किताब में उनकी ‘आह’ को महसूस किया तो रूह कांप गई। जरा सोचिए, अगर एसिड की एक बूंद आपके चेहरे या हथेली पर पड़ जाए तो क्या होगा ? ये सोचकर ही आपके रौंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन इन बेटियों पर पूरी बोतल उड़ेल दी गई। किसी के पड़ोसी ने, किसी के दूर के मामा ने, किसी के प्रेमी ने इनकार का ऐसा बदला लिया कि इन लड़कियों की जिंदगी हमेशा के लिए अंधेरे में चली गई।इन लड़कियों ने जिंदगी से हार नहीं मानी, मुसीबत का डटकर सामना किया ।

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने दिया नौकरी देने का आश्वासन ।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने दिया नौकरी देने का आश्वासन ।

किताब के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और नजमा हेपतुल्ला ने शिरकत की। एसिड विक्टिम लड़कियों की कहानी सुनकर हॉल में मौजूद हर शख़्स भावुक हो गया। मेनका गांधी ने कहा कि “तेजाब ने बेशक चेहरे को बदल डाला हो लेकिन लड़कियों ने हौसले और हिम्मत से दिखा दिया कि हम किसी से कम नहीं। एसिड वाली लड़की हम सभी को आगे बढ़ने का जज्बा देती है कि सिर्फ चेहरे से पहचान नहीं मिलती, सफलता तो हौसलों से मिलती है। मैं तो चाहती हूं कि ऐसा घिनौना काम करने वालों को उम्र कैद ही नहीं फांसी की सजा दे देनी चाहिए। आज तक जितने मामले आए हैं सभी केस में मर्दों ने औरतों पर, बेटियों पर तेजाब फेंका, लेकिन कहीं भी ये सुनने को नहीं मिला कि किसी लड़की ने किसी लड़के पर तेजाब फेंका हो।” मेनका गांधी ने एक प्रस्ताव भी रखा कि एसिड विक्टिम लड़कियों के भविष्य के लिए किसी के पास कोई आइडिया हो तो उनके पास लेकर आए। वो ऐसी लड़कियों के लिए कुछ करना चाहती हैं, ताकि इनका भविष्य सुरक्षित रहे और ये किसी पर बोझ बनकर ना रहें ।

प्रतिभा ज्योति की किताब ‘एसिड वाली लड़की’ के कुछ ही अंश पढ़कर मणिपुर की राज्यपाल डॉ नजमा हेपतुल्ला की आंखें डबडबा गईं। बोलते बोलते उनका गला रूंध सा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे हैवानों को कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए। फास्ट ट्रैक कोर्ट में तुरंत फैसला होना चाहिए। ताकि ये संदेश जाए कि किसी लड़की की जिंदगी बर्बाद करने का अंजाम बुरा होता है ।

एसिड पीड़ित लड़कियों के दर्द को सुनकर भावुक हुईं मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ।
एसिड पीड़ित लड़कियों के दर्द को सुनकर भावुक हुईं मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ।

एसिड विक्टिम लड़कियों के चेहरों का फ्री में प्लास्टिक सर्जरी करने वाले पद्मश्री डॉ अशोक गुप्ता भी विमोचन कार्यक्रम में शुरू से आख़िर तक मौजूद रहे। डॉ गुप्ता ने बताया कि तेजाब से जली लड़कियों के चेहरों की यदि 100 बार भी प्लास्टिक सर्जरी की जाए तो भी भगवान के बनाए स्वरूप को वापस नहीं पाया जा सकता। तेजाब रोम रोम तक जला देता है। जहां पड़ता है वहां कुछ नहीं बचता। लखनऊ की एसिड विक्टिम रेशम फातिमा ने सबके सामने बड़ी साफ-साफ अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि माना कि हम एसिड विक्टिम हैं, भगवान का दिया स्वरूप भले ही नष्ट हो गया हो लेकिन हम एक योद्धा हैं, मुसीबतों से लड़ना सीख लिया है। हमें चपरासी की नौकरी नहीं चाहिए, किसी का एहसान नहीं, सहयोग चाहिए। अगर कोई लड़की पढ़ी लिखी हो, इंजीनियर हो तो उसे उसके हिसाब से नौकरी दी जाए, ना कि एसिड विक्टिम समझकर उसे चपरासी की नौकरी देकर शर्मिंदा किया जाए।

कार्यक्रम का मंच संचालन टीवी एंकर सईद अंसारी ने किया। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब का डिप्टी स्पीकर हॉल खचाखच भरा हुआ था। हम लोगों के बीच दूर-दूर से आईं एसिड वक्टिम और उनके रिश्तेदार भी बैठे थे। प्रतिभा ज्योति जब अपनी किताब के बारे में बता रहीं थी। लड़कियों के दर्द को सुना रही थीं तो लगा रहा था मानो खुद के हाथ पर एसिड की बूंद गिरी हो। उनकी हालत के बारे में कल्पना भर से मन सिहर जा रहा था। प्रतिभा ज्योति ने अपनी किताब में लखनऊ की रेशम फातिमा, बोकारो की सोनाली मुखर्जी के बारे में बात की है। उन्होंने कविता की कराह और प्रज्ञा की चीख को शब्दों में  समेटने की कोशिश की है। किसी के चेहरे को बाजार में जला दिया गया, कोई ट्रेन में तड़पती रही, किसी को लिफाफे में दर्द भेजा गया तो किसी के मामा ने ही जिंदगी तबाह कर दी। एसिड ना सिर्फ भगवान के गढ़े स्वरूप को नष्ट कर देता है, बल्कि एसिड की शिकार लड़कियों की जिंदगी को हर दिन जलाता है।

परिजनों के साथ एसिड पीड़ित लड़कियां ।
परिजनों के साथ एसिड पीड़ित लड़कियां ।

प्रतिभा ज्योति ने अपनी किताब का नाम ‘एसिड वाली लड़की’ क्यों रखा ? अपनी किताब के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब एसिड पीड़ित लड़कियों के गांव, मोहल्ले में वो गई और उनका नाम लेकर पूछा तो किसी ने उनके घर का पता नहीं बताया लेकिन जब जिक्र किया कि जिस लड़की पर तेजाब फेंका गया था उसका घर किधर है? फिर क्या, लोग तपाक से पता बता देते थे… अच्छा वो एसिड वाली लड़की ? एसिड ने इन लड़कियों की ना सिर्फ जिंदगी छीन ली है, पहचान भी छीन कर कविता, पूजा, रेशमा को ‘एसिड वाली लड़की’ बना दिया है।

इस किताब को पढ़िए और लोगों को इसके बारे में बताइए ताकि इन लड़कियों का दर्द हर घर में पहुंचे। हो सकता है कोई तेजाब फेंकने की तैयारी में हो और ये किताब पढ़कर उसका मन बदल जाए। ये किताब घर बैठकर नहीं लिखी गई है। प्रतिभा ज्योति ने एसिड पीड़ितों के घर जाकर, उनके साथ रह कर, उनके दर्द को देखकर उसे एक पुस्तक का आकार दिया है। “तेजाब की एक बूंद अपनी हथेली पर महसूस कीजिए, पता चल जाएगा कि एसिड वक्टिम की जिंदगी कैसे कटती होगी, वो किस दर्द, पीड़ा से गुजरती होगी।”


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सत्येंद्र कुमार यादव,  एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय । माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र । सोशल मीडिया पर सक्रिय । मोबाइल नंबर- 9560206805 पर संपर्क किया जा सकता है।

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