8 साल बाद जारंग गांव में लौटी ‘उम्मीदों के स्कूल’ की रौनक

8 साल बाद जारंग गांव में लौटी ‘उम्मीदों के स्कूल’ की रौनक

ब्रह्मानंद ठाकुर

आखिर क्या वजह है कि जब कोई मंत्री या नेता गांव-गिराव में जाता है तभी प्रशासन को वहां की बदइंतजामियों की चिंता सताती है, क्या बिना मुख्यमंत्री, मंत्री के आए विकास का काम नहीं चलाया जा सकता है और वो भी ऐसे काम जिसकी आधारशिला खुद मुख्यमंत्री के हाथों रखी गई हो ।हम ये बात इस लिए कह रहे हैं क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी विकास-समीक्षा यात्रा के अपने तयशुदा कार्यक्रम के तहत 15 दिसंबर को मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड के जारंग गांव आ रहे हैं। वे आज से आठ साल पहले भी 2009 मे विकास यात्रा के दौरान इस गांव में आए थे। तब उन्होंने जारंग हाईस्कूल को प्लस टू का दर्जा दिए जाने की घोषणा स्थानीय जनता की मांग पर की थी। उनकी घोषणा के बाद एक साल के भीतर 12वीं तक के स्कूल का भवन तो बन गया लेकिन उसमें पढ़ाई शुरू होने में सात साल लग गये। ना तो विद्यालय का कोड आवंटिन हुआ, न शिक्षक बहाल किए गये और न ही विद्यालय में छात्रों का नामांकन हुआ। शिक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा । बीच-बीच में गांव के लोग स्कूल में पढ़ाई शुरू कराने को लेकर चिंता जाहिर जरूर करते, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इन सात सालों में प्लस टू स्कूल का भवन जर्जर सा दिखने लगा।
एक बार फिर जब 8 साल बाद सीएम नीतीश कुमार दोबारा इस गांव में आ रहे हैं सरकारी अमले को इसकी चिंता सताने लगी, लिहाजा आनन-फानन में रंग-रोगन और मरम्मत कर विद्यालय भवन को चमका दिया गया है।DIG ललन कुमार सिंह बताते हैं कि उन्होंने खुद पटना जाकर विद्यालय का कोड अलॉट कराया । अब सवाल बच्चों के दाखिले का आया तो खोज-खोज कर दिसंबर के महीने में बच्चों के नामांकन की खानी पूर्ति भी कर दी गई है । (ध्यान रहे यह महीना नामांकन का नहीं परीक्षा के फार्म भरने का है।) आनन – फानन में तीन शिक्षकों की तैनाती भी कर दी गई है । फिर ‘एक बाज का पर कतर करना अभय अपर को’ की तर्ज पर अन्य प्लस टू स्कूलों से यहां तीन शिक्षकों का भी प्रतिनियोजन कर दिया गया है। फूल-पौधे लगाए गये हैं। डीईओ बताते हैं कि वे लगातार विद्यालय पर नज़र रखे हुए हैं । अब दूर से ही यह विद्यालय चमकता नजर आने लगा है। यह है सरकार के आने का असर जारंग गांव में। लोगों का तो यहां तक कहना है कि’ सरकार’ अगर नहीं आते तो और शायद सात बरस लग जाते तो भी कॉलेज शुरू नहीं हो पाता ।

स्कूल ही क्यों, जारंग पश्चिमी पंचायत के सभी 13 वार्डों में विकास की हवा तेज दिखाई दे रही है। कर्मचारियों की कौन कहे, अधिकारी भी दिन-रात मुस्तैद रह कर आला अधिकारियों के आदेश-निर्देश के अनुरूप इस गांव में विकास की गंगा बहाने में मुस्तैद हैं। सबसे ज्यादा फोकस वार्ड नम्बर 8 पर किया जा रहा है। सरकार खुद इस वार्ड का निरीक्षण जो करेंगे। पूरे पंचायत को ओडीएफ घोषित करने की दिशा में बड़ी तेजी से काम हो रहा है। पंचायत के सभी 13 वार्डों में करीब डेढ़ हजार शौचालय बनवाए जा चुके है। विशेष रूप से वार्ड संख्या 2 और 8 में हर घर नल का जल पहुंचाने का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। पानीटंकी बन चुका है। कनेक्शन भी दिया जा चुका है। जिला के अधिकारी लगातार मानिटरिंग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के आज से आठ साल पहले जारंग आगमन की अगर आज से तुलना किया जाए तो यहां कोई खास बदलाव तबसे अबतक नहीं नजर आ रहा है। यह इलाका कृषि प्रधान इलाका है। यहां की करिब 25 हजार की आवादी अपनी जीविका के लिए खेती और पशुपालन पर आश्रि है । खेती का हाल जगजाहिर है ।पशुपालन भी अब घाटे का व्वयसाय बन गया है। आम किसान-मजदूर बदहाल हैं। छुटभैये नेताओं की अपनी अलग महत्वाकांक्षा है। लिहाजा मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर काफी उत्साह है लेकिन मेहनतकश आम आवाम में इस विकास यात्रा को लेकर उतना उत्साह नहीं देखा जा रहा है। वे तो इस कार्यक्रम को आठ साल पहले वाले कार्यक्रम के रूप मे ही देख-समझ रहे हैं।


ब्रह्मानंद ठाकुर। BADALAV.COM के अप्रैल 2017 के अतिथि संपादक। बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के निवासी। पेशे से शिक्षक। मई 2012 के बाद से नौकरी की बंदिशें खत्म। फिलहाल समाज, संस्कृति और साहित्य की सेवा में जुटे हैं। गांव में बदलाव को लेकर गहरी दिलचस्पी रखते हैं और युवा पीढ़ी के साथ निरंतर संवाद की जरूरत को महसूस करते हैं, उसकी संभावनाएं तलाशते हैं।

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