शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’

शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’

ब्रह्मानंद ठाकुर

किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए बार-बार प्रयास किया लेकिन हर मोर्चे पर षड्यंत्रकारी विफल रहे। आज किसान आंदोलन देशव्यापी रूप ले चुका है। ये बात ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सत्यवान ने बिहार के मुजफ्फरपुर के साइंस कॉलेज में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि तीन काले कृषि कानून और बिजली संशोधन बिल 2020 एक ही उद्देश्य से यानी किसानों की खेती और जमीन पर कॉरपोरेट घरानों के कब्जे के लिए बनाए गए। 1955 के आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन करके कॉरपोरेट घरानों को बेलगाम जमाखोरी का कानूनी अधिकार दिया गया है। इससे आवश्यक वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़ेंगे और इसका नुकसान आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

सत्यवान जी ने कहा कि भारत में 86% छोटे किसान हैं। उन्हें निजी कॉरपोरेट्स मंडियां तबाह कर देंगी। गुणवत्ता के नाम पर छोटे किसानों को लूटा जाएगा। निजी मंडियां सरकारी मंडियों का गला घोंट देगी। साथ ही बिजली संशोधन बिल 2020 कानून बनने से बिजली की पैदावार से सप्लाई तक सब कुछ निजी हाथों में चला जाएगा। बिजली बेतहाशा महंगी हो जाएगी और किसानों को अपनी फसल पर लागत ज्यादा लगानी होगी। यही वजह है कि तीन कृषि कानून और बिजली बिल 2020 के खिलाफ किसानों और आम जनता को एक साथ खड़े होना चाहिए। उन्होंने अंत में कहा कि काले कृषि कानून एवं बिजली बिल 2020 सरकार को वापस लेने होंगे एमएसपी पर फसलों की खरीद की गारंटी का कानून लाना होगा नहीं तो किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।

उड़ीसा से आए किसान नेता रघुनाथ दास ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसानों का नहीं बल्कि पूरी जनता का आंदोलन बन चुका है हर राज्य में बड़ी-बड़ी महापंचायतें हो रही है। मुजफ्फरपुर का किसान महापंचायत इसका गवाह है। उन्होंने 26 मार्च को संयुक्त मोर्चा के भारत बंद को सफल बनाने का आह्वान किया।किसान महापंचायत का उद्घाटन किसान नेता एवं समाजवादी चिंतक श्री लक्षण देव प्रसाद सिंह ने किया एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के बिहार राज्य सचिव लालबाबू महतो ने किया।

महापंचायत में सैकड़ों ट्रैक्टरों पर हजारों किसानों ने हिस्सा लिया जिसमें किसानों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं एवं खेत मजदूर शामिल थे। महापंचायत को उत्तर प्रदेश के किसान नेता मिथिलेश कुमार मौर्य एवं झारखंड के किसान नेता धीरेन भकत, गन्ना उत्पादक संघर्ष मोर्चा के आनंद किशोर एवं आलोक कुमार, मुजफ्फरपुर किसान सभा के नेता चंदेश्वर प्रसाद चौधरी, पूर्व विधायक बालेंद्र प्रसाद सिंह, सुरेंद्र कुमार, शाहिद कमाल, अनिल प्रकाश, भव चंद्र पांडे भानु, शिव शंकर मिश्रा, डॉ. बी के प्रलयंकर, मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह अरविंद वरुण, डॉ. एम एस रजवी, नमिता सिंह, तारकेश्वर गिरी, इंद्रदेव राय, योगेंद्र राम, उमाशंकर साहनी अविनाश साईं एवं ललित कुमार घोष आदि ने संबोधित किया।

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One thought on “शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’

  1. भारत मे किसान उपभोक्ता संघर्ष समिति के जरिये आंदोलन को राष्ट्रव्यापी आधार ओर धार तेज करनी होगी।मैं स्वयं 1978 से सक्रिय रूप से जन आंदोलन से जुड़ा हूँ।किसान को फसल का लाभकारी मूल्य और उपभोक्ताओ को उचित मूल्य पर वस्तु ओर सेवाए मिले ये आवश्यक है।मूल्य नियंत्रण आयोग बनाकर वस्तु ओर सेवाओ की कीमतें लागत मूल्य से जोड़कर उपभोक्ता को लूट से बचना आवश्यक है।
    एडवोकेट प्रहलाद राय व्यास केंद्रीय सचिव उपभोक्ता अधिकार समिति रजि.

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