वसंत, फाग और प्रेम कविताओं का चक्रव्यूह

वसंत, फाग और प्रेम कविताओं का चक्रव्यूह

‘पेड़ों की छांव तले रचना पाठ के अंतर्गत 29वीं साहित्यिक गोष्ठी वैशाली गाजियाबाद स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में रविवार 26 फरवरी को सम्पन्न हुई। मदमाती बसंत ऋतु और कसमसाते फाग की अंगड़ाइयों ने काव्य गोष्ठी में मधुमास के सभी रंग भरे। इस साहित्य गोष्ठी में आमंत्रित एवं स्थानीय कवियों, कहानीकारों , उपन्यासकारों, आलोचकों, प्रकाशकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। कविता, गीत, गजल, दोहे की सृजनात्मकता बसंत ऋतु को समर्पित रही।

प्रमुख कवियों में वरिष्ठ कवि कृष्ण मोहन उपाध्याय ने गजल व दोहे पढे, “पौधे पौधे महक रहे, हंसी खुशी की बात। दिन के हांथ हुए पीले , मेहँदी रचती रात ॥“ कुंडलियों और मुक्तक के साथ रणवीर सिंह ने कहा “प्रेम तो एक प्यास है / अधिकार मैं कैसे कहूँ, दो तानों की वासना को , प्यार मैं कैसे कहूँ । “श्रोताओं को आनंदित किया । वरिष्ठ कवि अवधेश सिंह ने प्रेम कविता “फूलों की डालियाँ / जमीं तक झुक आती हैं / कदम सीधे नहीं पड़ते / दहलीजें मुस्करातीं हैं / मन उड़ हो जाता है आकाश / प्यार में / .कुछ तो होता है खास “ को सुना कर श्रोताओं को भाव विभोर किया।

वहीं कवि अमर आनंद ने अपने अंदाज में प्रेयसी को कहा “कुछ इस कदर तुम से मैं खुद को जोड़ता हूँ / कि तुम रोज नए चक्रव्यूह बनती हो में उसको तोड़ता हूँ“। कवियत्री सुश्री मीता राय ने कहा “उमड़ घुमड़ रहे हैं साँझ से यादों के बादल, आज फिर रात भर जम कर बरसात होगी …../ तुम तो छोड़ गए तन्हाईयों के साथ मुझे / तुमसे अब क्या खाक मुलाक़ात होगी । उमेश चंद्र अग्रवाल ने अपनी कविता “ हरीतिमा चादर बिछाई धरा ने / फूलों की चूनर सजाई धरा ने । रंगों में बिखरे रंग अनंत , आने वाला है बसंत । गीत कारों में वरिष्ठ गीत कार कन्हैया लाल खरे, रामेश्वर दयाल शास्त्री ने गीत छंद सुनाये । इसके साथ ही वरिष्ठ रचनाकार नीरद जनवेणु, संजीव ठाकुर, डॉ वरुण कुमार तिवारी, मनोज द्विवेदी और प्रमोद मनसुखा ने अपनी कवितायें पढ़ीं।

प्रारम्भ में कार्यक्रम संयोजक वरिष्ठ कवि अवधेश सिंह ने गोष्ठी में पधारे रचनाकारों का स्वागत किया। गोष्ठी के समापन पर आभार व्यक्त करते हुए गोष्ठी के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि आलोचक डा वरुण कुमार तिवारी ने गोष्ठी की निरंतरता को बनाए रखने का अनुरोध करते हुए सबको धन्यवाद दिया। उपन्यासकार मनीष कुमार सिंह, सर्वश्री शिवानंद तिवारी, गोविंद सिंह, रति राम, सी एस झा, प्रमोद कुमार वर्मा, दयाल चंद्र , आर सी पाण्डेय , धीरेन्द्र नाथ तिवारी, हरीश चंद्र जोशी, राम कृष्ण शर्मा , राम अवतार गर्ग, कपिल देव नागर, जेएस रावत और बीर राज टंडन आदि प्रबुध श्रोताओं ने रचनाकारों के उत्साह को बढ़ाया। गोष्ठी का संचालन संयोजक कवि अवधेश सिंह ने किया।

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One thought on “वसंत, फाग और प्रेम कविताओं का चक्रव्यूह

  1. मित्र यदि साथ और सहयोग प्रदर्शन को एक साथ इस अभियान से जोड़कर देखा जाए तो बदलाव डाट काम की रिपोर्टिंग याद और संदर्भ का काम करेगी । बहुत बहुत आभार – अवधेश सिंह

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