हां और ना के विकल्प के बीच जिंदगी की ‘संकल्प- धारा’

हां और ना के विकल्प के बीच जिंदगी की ‘संकल्प- धारा’

फोटो साभार अरुण कुमार

दयाशंकर मिश्र

बहुत सी चीजें हैं, जिनका ‘हां और न’ में कोई जवाब नहीं. जहां जीवन का प्रश्न है, वहां तो यह बिल्कुल ही बेकार हो जाते हैं. जीवन में हां और न के जवाब एकदम बेकार हैं. #जीवनसंवाद हां और न के बीच!

जीवन संवाद-960

हम में से बहुत से लोगों का विचार ‘हां और न’ के बीच में तुरंत फैसला करने का होता है. व्यवहार में तो यह ठीक हो सकता है, लेकिन जीवन के संबंध में निर्णय लेने के मामले में यह बहुत उपयोगी नहीं, क्योंकि जो हां के साथ है वह मित्र मान लिया जाता है और जो न के पक्ष में है, उसे शत्रु भले न माना जाए, लेकिन मित्र कभी नहीं माना जाता. इसलिए, जो साथ न भी आए उसे हमेशा यह नहीं माना जाना चाहिए कि वह पक्ष में नहीं. जीवन का अनुभव बताता है कि अनेक लोग स्वयं को व्यक्त नहीं कर पाते. वह भी आपके पक्ष में होते हैं, लेकिन उनके भीतर की भावना शब्द के रूप में बाहर नहीं आ पाती. संभव है, वह चाहते कुछ और हों, लेकिन प्रकट रूप में साथ खड़े होने का निर्णय नहीं कर पाते.

एक छोटा-सा किस्सा कहता हूं आपसे. संभव है, इससे मेरी बात अधिक स्पष्ट हो पाए. मुल्ला नसरुद्दीन पर एक मुकदमा चल रहा है, अदालत में मजिस्ट्रेट साहब कहते हैं, तुम सीधी सीधी बात नहीं करते. तुम्हारे शब्दों में जादूगरी है. तुम शब्दों को ऐसा घुमा देते हो कि हमें बड़ी कठिनाई होती है. तुम हां और न में जवाब दो. नहीं तो मुकदमे कभी खत्म नहीं होंगे. तुम हां और न में जवाब दोगे तभी यह हल हो पाएंगे.नसरुद्दीन ने कहा, लेकिन जो भी बातें जवाब देने योग्य हैं, वह हां और न में कही ही नहीं जा सकतीं और जो बातें जवाब देने योग्य नहीं हैं, वही हां और न में दी जा सकती हैं. जज साहब, आपने मुझे जो कसम खिलाई है सत्य बोलने की, वह वापस ले लें. फिर मैं हां और न में जवाब दे सकूंगा. आपकी कसम ही मेरे आड़े आ जाती है. सत्य ऐसा नहीं है कि हां और न में जवाब दिया जा सके. मजिस्ट्रेट को आश्चर्य हुआ. वह नसरुद्दीन से थोड़ा ही परिचित था. उसने कहा, अच्छा मुझे कोई एक उदाहरण दें, जिसका जवाब हां और न में देना संभव न हो. नसरुद्दीन कहते हैं, ‘मैं आपसे पूछता हूं- क्या आपने अपने बच्चों को पीटना बंद कर दिया है. आप हां और न में जवाब दें.’ मजिस्ट्रेट को बड़ी दिक्कत हुई. अगर वह हां कहे, तो इसका मतलब पहले पीटता था, अगर वह कहें कि न, तो इसका मतलब, अभी भी पीट रहा है! नसरुद्दीन ने मुस्कराते हुए कहा, क्या ख्याल है!

बहुत सी चीजें हैं, जिनका हां और न में कोई जवाब नहीं. जहां जीवन का प्रश्न है, वहां तो यह बिल्कुल ही बेकार हो जाते हैं. जीवन में हां और न के जवाब एकदम बेकार हैं.मनुष्य के बारे में कोई भी निर्णय, वक्तव्य पूर्ण नहीं हो सकता. वह केवल आज के लिए, बल्कि अभी के लिए तो ठीक है, लेकिन अगले ही क्षण के लिए नहीं. एक छोटा-सा संदर्भ, इसे सरलता से आप तक पहुंचाएगा. नवजात, बच्चा माता-पिता के पास पल रहा है. अभी उसके बारे में कुछ कहना संभव नहीं. आगे चलकर वह कुछ भी हो सकता है. हिटलर से सिकंदर और गांधी तक उसके होने की संभावना है. जब वह अपनी यात्रा को समाप्त कर रहा होगा, तभी उसके बारे में विश्वासपूर्वक कुछ कहा जा सकता है. जब तक हम अपने जीवन के चक्र (सर्किल) को पूरा नहीं कर लेते, हमारे बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं. जब तक जीवन चल रहा है किसी के बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं. मनुष्य गिरगिट की अपेक्षा कहीं तेज रंगबाज है. हमारे, आसपास अनगिनत कहानियां हैं, जो कहती हैं कि जीवन अद्भुत संभावना है. वह कल्पना से भी अनिश्चित है. जो आज कहा जा रहा है, केवल आज के संदर्भ में उपयोगी है. कल जीवन किस करवट बैठेगा, यह कहना हमारी क्षमता और सीमा के बाहर की बात है. इसीलिए नसरुद्दीन ‘हां और न’ को नकार देते हैं.ई-मेल dayashankarmishra2015@gmail.com

दयाशंकर। वरिष्ठ पत्रकार। एनडीटीवी ऑनलाइन और जी ऑनलाइन में वरिष्ठ पदों पर संपादकीय भूमिका का निर्वहन। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र। अवसाद के विरुद्ध डियर जिंदगी के नाम से एक अभियान छेड़ रखा है।

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