आज में खुश रहने की कला सीख लीजिए..इसी में जीवन का आनंद है

आज में खुश रहने की कला सीख लीजिए..इसी में जीवन का आनंद है

दयाशंकर मिश्र

हम भूल रहे हैं कि जब भी कल आएगा, वह आज हो जाएगा! हमारी सोच कल की है. उसमें आज का कोई महत्व नहीं. असल में आज को जीने का हमारा अनुभव ही नहीं. सब आनंद कल के इंतजार में हैं, हम कल की गुलामी कर रहे हैं .#जीवनसंवाद कल का आज होना!

जीवन संवाद-959

हमारी जीवनशैली में इधर जो सबसे बड़े बदलाव हुए हैं, उनमें से एक है- कल की प्रतीक्षा. कल जब सुखी हो जाएंगे, तब चैन से जिएंगे. कल जब प्रसन्नता झोलीभर कर आएगी तब उसमें आनंद के गोते लगाएंगे. यह एक ऐसा अभ्यास है, जिसका असर हमारी धमनियों में लहू बनकर बह रहा है. हम भूल रहे हैं कि जब भी कल आएगा, वह आज हो जाएगा! हमारी सोच कल की है. उसमें आज का कोई महत्व नहीं. असल में आज को जीने का हमारा अनुभव ही नहीं. सब आनंद कल के इंतजार में हैं, हम कल की गुलामी कर रहे हैं.असाध्य बीमारी से जूझ रहे एक दोस्त से मिलने मैं कुछ दिन पहले गया. उसकी आंखों की गहराई में देखता हूं कि केवल आज है. उसके यहां मुझे कल कहीं दिखाई नहीं दिया.

शरीर और जीवन को हमने ऐसा कूड़ेदान बना लिया है कि सबकुछ उसमें फेंके जा रहे हैं. स्वस्थ दिमाग और शरीर लिए लोग दोनों का ही उपयोग कुछ इस तरह कर रहे जैसे उन्हें इसकी किसी तरह फिक्र ही नहीं. हम मनुष्य होकर रोबोट बनने के लिए इतने लालायित हैं कि मनुष्यता के निशान धीरे-धीरे छुपाते जा रहे हैं. नष्ट करते जा रहे हैं. संवेदनशीलता, जरूरत के वक्त मदद और अपने किए गए वादे का ख़्याल हमारे होने के सबसे महत्वपूर्ण निशान हैं. जो बीमार है, जिसने देख लिया है कि बीमार मन/ मन के क्या मायने हैं, उसके मन की दशा सजग अनुभव के कारण आज के प्रति प्रेम से भर सकती है. चलो, आज तो जी लिया, जबकि जो बाकी दुनिया है, उसके राग इससे उलट हैं. वही पुरानी कहानी, आज का दिन फिर उदास करके गया मुझे!इस तरह आज कभी रह नहीं जाता, आज आते ही कल में बदल जाता है. यह जो आज का गुम होना है, असल में जीवन की सुगंध का मन से दूर होते चले जाना है. इस नौकरी में खुश नहीं हूं. नौकरी बदल जाए, तो कुछ बात बने. नौकरी बदलते ही, फिर नए अरमानों की फसल. आज में रहने को हमारी कोई तैयारी नहीं.

हम कल की नाव बनाने में रात-दिन खपे हैं.अनजाने में ही हमने आज से शत्रुता कर ली है. जीवन की गति एकदम विपरीत दिशा में चली गई है. जब आज खुश होने को राजी नहीं हैं, तो जैसे ही कल आज में बदलेगा, जीवन की मौज छूटती जाएगी. कबीर के वचन हमने बचपन से सुने हैं, गुनने वाले कम दिखते हैं.कबीर कहते हैं-काल करे सो आज कर, आज करे सो अब.पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब.इसका अर्थ केवल इतना नहीं जो बचपन से सिखाया गया कि सारे काम आज कर लो. यह जीवन के लिए बड़ी सुंदर बात है, आज का भरोसा है, कल का नहीं. इस तरह हर दिन असल में केवल आज है, क्योंकि केवल आज ही है, इसके बारे में ही निश्चयपूर्वक कुछ कहा जा सकता है. कल, हमारे नियंत्रण से बिल्कुल बाहर है. एकदम बाहर. जैसे आकाश, धरती की पहुंच से बाहर है. दिखता है कि पकड़ लेंगे, वहां तक पहुंच जाएंगे, लेकिन क्षितिज के भ्रम में हम केवल दौड़ते हैं. इसलिए आज से प्रेम एक नितांत जरूरी कदम है, मनुष्यता और कोमलता के लिए. जिसे केवल आज से अनुराग है, वह मन में बहुत कांटे न रख पाएगा. अब कबीर के वचन जब कभी याद आएं, उनमें आज की सुंदरता जरूर खोजें. उन्हें, अपने निकट पाएंगे.ई-मेल dayashankarmishra2015@gmail.com

दयाशंकर। वरिष्ठ पत्रकार। एनडीटीवी ऑनलाइन और जी ऑनलाइन में वरिष्ठ पदों पर संपादकीय भूमिका का निर्वहन। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र। अवसाद के विरुद्ध डियर जिंदगी के नाम से एक अभियान छेड़ रखा है।

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