मसूरी की नहीं, विधायक को जघन्य अपराध करने वाले की है चिंता !

मसूरी की नहीं, विधायक को जघन्य अपराध करने वाले की है चिंता !

बाएं- बीजेपी नेता गणेश जोशी और डीपी यादव की तस्वीर।

उत्तराखंड के नेता खोखले हैं ये बात एक बार फिर गणेश जोशी ने साबित कर दी. विवादों को साये की तरह साथ रखने वाले मसूरी के विधायक गणेश जोशी को अपराधी, माफिया डीपी यादव की चिंता सता रही है. हत्या के केस में देहरादून जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे डीपी यादव को गणेश जोशी रिहा कराना चाहते हैं. गणेश जोशी ने उत्तराखंड सरकार को एक चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में हत्यारे डीपी यादव को पैरोल पर छोड़ने की मांग की है.

अपराधी डीपी यादव

मसूरी में लोग दूषित पानी पी रहे हों, गणेश जोशी को इसकी परवाह नहीं है. मसूरी की यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गणेश जोशी को फर्क नहीं पड़ता. मसूरी में पार्किंग को लेकर लोग परेशान हों, गणेश जोशी को इससे भी कुछ लेना-देना नहीं है. मसूरी में मोबाइल कनेक्टिविटी बहुत खराब हो, गणेश जोशी का इससे भी कोई वास्ता नहीं है. गणेश जोशी ने शायद ही कभी सरकार को मसूरी के विकास और समस्याएं दूर करने को चिट्ठी लिखी हो. लेकिन एक माफिया, गैंगस्टर, डकैत और आतंकी गतिविधियों के आरोपी को पैरोल दिलाने की मांग मसूरी विधायक ने बेहिचक कर दी है.
अब जरा डीपी यादव के बारे में भी थोड़ा जान लीजिये जिसके लिये गणेश जोशी के मन में प्यार और दया उमड़ी है. डीपी यादव एक कुख्यात शराब माफिया, डकैती, अपहरण और फिरौती को उद्योग बनाने वाला अपराधी रहा है. अभी वो हत्या के केस में उम्रकैद की सजा काट रहा है. ये तो इसके अपराध की एक बानगी भर है. डीपी यादव पर 9 लोगों की हत्या का आरोप है. 1990 में हरियाणा में डीपी यादव के ठेके की जहरीली शराब पीकर 350 लोगों की मौत हो गयी थी. इसके बाद इसने राजनीतिक शरण ले ली और धड़ल्ले से अपने काले कारनामों को अंजाम देता रहा. डीपी यादव पर हत्या के साथ ही डकैती, अपहरण और फिरौती के कई केस दर्ज हैं. हद तो ये है कि डीपी का बेटा विकास यादव भी चर्चिच नीतीश कटारा हत्या केस में जेल में बंद है. विकास हत्या में 25 साल की जेल की सजा काट रहा है. ऐसे जघन्य अपराधी की पैरवी करने वाले विधायक गणेश जोशी उदाहरण हैं उत्तराखंड के नेताओं की गिरी हुई सोच और राजनीति के निम्नतम स्तर के.


उत्तराखंड के गैरसैंण के निवासी बी डी असनोड़ा । लंबे अरसे से वो गांव, शहर से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग मंचों से उठाते रहे हैं।

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