बहू अंजलि ग्रेजुएट हो गई!

बहू अंजलि ग्रेजुएट हो गई!

मिथिलेश कुमार राय

सवेरे जब मैं काम पर निकल रहा था, माँ बोली कि मिठाई लेते आना। कल शुक्रवार है। थान पर चढ़ाना है- पतोहू ग्रेजुएट हो गई। जरूर। यह खुशी की बात है। गांव में ग्रेजुएट पतोहू गिनी-चुनी ही होंगी। मैं खुद इस क्षण को महत्वपूर्ण मानता हूँ।

अंजलि का रिजल्ट आ गया। उसे स्नातक में द्वितीय श्रेणी मिला है। उसने बहुत किया। चूल्हा-चौका और बाल-बच्चे के साथ ही घर-परिवार चलाती हुई उसने क्या उपलब्धि हासिल की है, यह मैं समझ सकता हूँ। कोई लड़की जब शादी के बाद यहाँ बहू के रूप में प्रवेश करती हैं तो सबसे बड़ा खतरा उनकी शिक्षा पर ही मंडराता है। एक तो गांव-घर का ढंका हुआ माहौल और दूसरा उच्च शिक्षा की बदतर स्थिति के कारण यहाँ कॉलेज की पढाई को लेकर लड़कियों में कोई खास आकर्षण नहीं रहता।

लोग किसके भरोसे क्या करें। कहाँ-कहाँ जाए। आठवीं तक का स्कूल है, अगल-बगल में तो ठीक है। उसके बाद अभिभावक बड़े असमंजस में आ जाते हैं। फिर, पिछले दिनों रवीश कुमार द्वारा बी एन मंडल विश्वविद्यालय पर प्रकाश डाला ही जा चुका है कि सत्र कितने पीछे चल रहे हैं। पांच-छह साल से पहले ग्रेजुएशन पूरा करना संभव नहीं। गांव-देहात का हमारा समाज अब भी लड़कियों के मामले में ज्यादा रिस्क नहीं लेता है। वे ज्यादा से ज्यादा बगल के किसी शहर के किसी कॉलेज में बेटी का एडमिशन भर कराकर उनके हाथ पीले करने की फ़िक्र में आ जाते हैं। बाद बाकि गेंद दूल्हे के पाले में आ जाती है कि वे उसे आगे बढ़ाए या घर में सहेज कर रख दें।

अंजलि लगी रही। 2013 में शादी और 2015 में बच्चे के बाद भी। बीच में साल भर पढाई में ब्रेक लगा और एक इयर का एग्जाम भी छूट गया। पर इससे क्या। उसने फिर डगर पकड़ ली और आज उसके पास एक प्रमाण-पत्र के रूप में उसका छोटा सा सपना साकार रूप में उसके सामने है। वह कह रही है कि आगे वह लाइब्रेरी साइंस में डिप्लोमा या टीचर ट्रेनिंग कोर्स करेगी और एक दिन घर से बाहर निकल कर काम भी करेगी। माँ उसकी यह बात सुनकर खिलखिला कर हंसने लगती हैं!


मिथिलेश कुमार राय। सुपौल के निवासी। बीएनएमयू से उच्च शिक्षा हासिल की।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *