धरती और अम्बर में उपजा है प्यार भर-भर!

धरती और अम्बर में उपजा है प्यार भर-भर!

अखिलेश शर्मा

देखो फिर से धरती और अम्बर में उपजा है प्यार भर-भर,
आसमान में आज फिर से छाए है बदरा और है बारिश के आसार,
इस समाचार का मैं कैसे और किसको करू आभार,
कुदरत ले कर आया देखो कितना सुंदर ये उपहार।

आस फिर से जगी है की अब के फिर होगी बौछार,
प्रकृति ने आज अपने मिजाज़ में फिर से लौटाई है बहार,


खुशियां फिर से पैर रखेंगी सब के संसार,
रिमझिम बूंदे बंजर नजारों के लिए लाई है जीवन का करार।

झिमजिम रिमझिम बरस रहे है धरती पर अब फुहार,
उम्मीदें उम्मीदों से मिलकर ला रही है नई बयार,
अब निशा छटने को है और आने को है त्यौहार,
भा गया हमें ये प्रकृति का आचार और सदाचार,
नतमस्तक हो कर मैं करता अनंत साभार।

पानी आया झर-झर, बादल गरजे गर-गर,
मेघ आयो बन-ठन, सँवर,”पाहुन” हमारे जो आए आज ही दोपहर,
हर्षित, पुलकित और रोमांचित कर गए मेरे शेष पहर!
सुस्त बैठा ताल फिर से है हरसाया और लाया पानी परात भर-भर,
कण-कण शंकर बोलो हर-हर, पवन बह रही सर-सर,
देखों फिर से धरती और अम्बर में उपजा है प्यार भर-भर!!

अखिलेश शर्मा/केनरा बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक रह चुके हैं । संप्रति नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्त सेवा विभाग में प्रतिनियुक्ति ।

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