कैसे हैवानियत में बदल गई रुमानियत ?

कैसे हैवानियत में बदल गई रुमानियत ?

 

finalहमारे चेहरे पर अगर दाग हो जाए तो आइने में उसे बार-बार देखते हैं । उसे हटाने के लिए तरह-तरह के उपाय खोजते हैं । कोई डॉक्टर के पास जाता है, कोई नीम हकीम के पास । कई तरह के फेयरनेस क्रीम लगाते हैं । जब तक दाग साफ ना हो जाए मन उलझा रहता है । मुहासे होने पर दुप्पट्टे से मुंह ढंक कर निकलना पड़ता है । आंख के नीचे काला पड़ जाने पर बेचैनी बढ़ जाती है । लेकिन जरा सोचिए वे लड़कियां कैसे जीती होंगी जिनके चेहरे की चमड़ी तेजाब में पिघल गई हो ? आप अंदाजा नहीं लगा सकते एसिड विक्टिम लड़कियों के दर्द का । वरिष्ठ पत्रकार प्रतिभा ज्योति ऐसी ही लड़कियों की दर्द भरी कहानियों को अपनी किताब ‘एसिड वाली लड़की’ में लिखा है । उसके कुछ अंश आपके सामने है- 

‘बाजार में भरे बस स्टॉप पर इस तरह शादी का प्रस्ताव देना उसे बेहद अपमानजनक लगा था। अपमान के भाव और भय ने उसे अंदर तक हिला दिया। दोनों हाथों से अपने चेहरे को ढ़कते हुए हुए वह बिलख पड़ी थी। वह जनवरी का कंपकंपाता महीना था लेकिन भय, अनिश्चितता और शर्म से वह पसीने से तरबतर थी।’

“उनके हाथ में एक बड़ा चाकू था । चाकू दिखाकर उन्होंने मुझे कार के अंदर बैठने के लिए मज़बूर कर दिया । इसके बाद वह मुझे हाईवे की तरफ ले गए । मुझे बालों से कस कर पकड़ रखा था और वे मुझे गालियां दे रहे थे । कुछ ही सेकंड में महसूस हुआ मेरी चमड़ी पिघल रही है …।“

ट्रेन अपनी रफ्तार में थी तभी अचानक उसके चीखने की आवाज़ आई। अगल-बगल के यात्री चीख सुनकर जाग गए। पूरे कोच में खलबली मच गई। ‘क्या हुआ-क्या हुआ’ का शोर होने लगा। जितनी तेज रफ्तार से पटरी पर ट्रेन दौड़ रही थी उसी रफ्तार से प्रज्ञा की चीखें बढ़ती जा रही थी । दर्द और पीड़ा से छटपटाते हुए बर्थ से नीचे गिर गई । चलती ट्रेन में आखिर हुआ क्या?

‘अप्वाइंटमेंट लेटर खोलकर दफ्तर में ही देख लिया था। लिहाजा, जज़्बात छिपाना मुश्किल हो रहा था। पापा बोलते जा रहे थे- दफ्तर के acid-girlतमाम लोग मिठाइयां मांग रहे हैं…अभी मंगाता हूं। यह कहते हुए वो घर से निकल गए और प्रीति राठी को उस कल्पनालोक में छोड़ गए जहां भविष्य के सुनहरे सपनों का नया सिलसिला था ।’ लिफाफे में कैसे आया था प्रीति के लिए मौत का पैगाम….?

कविता को फैज की मोहब्बत पर इतना यकीन हो गया जितना उसे खुद पर नहीं था। फैज के वादों को उसने जिंदगी की हकीकत समझा। वह शादी की बातें करता, परिवार की बातें करता, बच्चों की बातें करता तो उसे ये सब आने वाले कल की बातें लगतीं। फैज उसके दिलोदिमाग पर पूरी तरह छा गया था। उसे पा लेना कविता की ज़िंदगी का मकसद बन गया था। लेकिन कैसे हैवानियत में बदल गई रुमानियत……?

प्रतिभा ज्योति, लेखिका
प्रतिभा ज्योति, लेखिका

“छोटी सी चिंगारी की आंच के एहसास को याद कीजिए और फिर यह सोचिए कि अगर आपके बदन पर ज्वालामुखी का लावा डाल दिया जाए तो आपकी पीड़ा का क्या हाल होगा। मेरी दोनों आंखों में समझिए लावा डाल दिया गया था।“

प्रतिभा ज्योति की किताब #AcidWaliLadki में जानिए बारह साल बाद भी उस जलन को याद कर क्यों कांप जाती है सोनाली की रुह ? ऐसा बताते हुए कविता का चेहरा अब भी क्यों सख्त हो जाता है…? आखिर क्या हुआ था लखनऊ की रेशम फातिमा के साथ….? चलती ट्रेन में आखिर हुआ क्या? ‘लिफाफे में कैसे आया था प्रीति के लिए मौत का पैगाम’….? कैसे हैवानियत में बदल गई रुमानियत……? बोकारो की सोनाली मुखर्जी क्यों बन गई ‘एसिड वाली लड़की’? 7 अक्टूबर 2016, दिन शुक्रवार, शाम 5 बजे डिप्टी स्पीकर हॉल, कॉन्स्टीट्यूशन क्लब, रफी मार्ग, नई दिल्ली, प्रतिभा ज्योति की किताब ‘एसिड वाली लड़की’ का विमोचन होगा । एसिड से भी खाक नहीं कविता का सौंदर्य

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