एक अधिकारी से झांसी को ‘अनुराग’ हो गया

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय को इन दिनों ‘देशद्रोहियों’ का अड्डा साबित करने की कोशिश चल रही है। लेकिन इसी विश्वविद्यालय से निकले प्रशासनिक अधिकारी जनता से एक रिश्ता कायम करते हैं-सुख-दुख का, क्या ये ‘देश प्रेम’ के दायरे में नहीं आता? बहरहाल, ये बहस लंबी है… लेकिन संतोष पाठक एक अधिकारी के तबादले से इतने भावुक हो गए कि चंद लाइनें लिख डालीं… सीधे दिल से।

संतोष पाठक

anurag yadav-1जी हां! एक इंसान का स्थानांतरण, क्योंकि मैंने सिर्फ़ अब तक अफ़सरों के स्थानांतरण ही देखे थे। लेकिन, झांसी के जिलाधिकारी अनुराग यादव का स्थानांतरण हुआ तो लगा कि एक अच्छे इंसान का स्थानांतरण हो गया। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद लोग अफ़सर तो बन जाते हैं, लेकिन इंसानी कर्तव्य भूल जाते हैं।

बतौर झांसी के जिलाधिकारी अनुराग यादव ने वह कर दिखाया जो देश के गिने-चुने जिलाधिकारी ही कर पाते हैं। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी से पढ़कर निकले आईएएस अनुराग यादव ने उत्तर प्रदेश में जरूरत मंदों की लीक से हटकर मदद की। बुन्देलखण्ड के किसानों का दर्द समझते हुए एक ऐसी ऐतिहासिक पहल भी की, जो खुदकुशी करने वाले किसान परिवारों के लिए उम्मीद की नई रौशनी में बदल गई। उन्होंने एहसास करा दिया कि जो अफ़सर बनकर नहीं हो सकता, वह इंसान बनकर तो किया ही जा सकता है।

anurag yadav-2तंगहाली में मौत को गले लगाते अन्नदाताओं के परिवार के आंसू पोंछने का जिम्मा उन्होंने अपनी धर्मपत्नी और आकांक्षा समिति की अध्यक्ष प्रीति चौधरी को सौंपा। दोनों ने मिलकर अपने निजी संपर्कों से पैसा जुटाया। झांसी जिले में खुदकुशी करने वाले और सदमे से मरने वाले किसान परिवारों की विधिवाओं व उनके रिश्तेदारों को एक-एक लाख रुपए की एफडी के जरिए आर्थिक मदद की। जिले के करीब 52 किसान परिवारों को 60 लाख रुपए से भी अधिक आर्थिक मदद कर एक नई मिसाल कायम कर दी।

यह कोई मामूली मदद नहीं, बल्कि दूसरे जिलों के अधिकारियों को आईना दिखाती एक नज़ीर है। इस मदद ने किसान मुखिया की मौत के बाद गुरबत में जी रहे उसके बेबस परिवार के सपनों को जीने की नई दिशा देने का काम किया। कई गरीब किसानों की बेटियों की शादी के लिए भी पैसों का इंतजाम कराया। जिलाधिकारी अनुराग यादव की कार्यशैली ही कुछ ऐसी है कि वो लोगों को अपना मुरीद बना लेते हैं। उन्हें दिल से सलाम करने को जी चाहता है।

बेशक प्रमोशन होने के बाद आपका स्थानांतरण हुआ है, लेकिन झांसी में रहकर आपने जो किया है, वो हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। झांसी आपको नहीं भूलेगा। इस क्षेत्र को आपकी जरूरत थी। पूरा बुन्देलखण्ड आज सूखे की पीड़ा से जूझ रहा है। किसान खुदकुशी कर रहा है और इन बदहाल हालातों में बुन्देलखण्ड को एक अदद ‘अनुराग यादव’ चाहिए !


santosh pathakसंतोष पाठक। झांसी में जनता से जुड़े मुद्दों को अपनी लेखनी से आवाज़ देते रहे हैं।


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One thought on “एक अधिकारी से झांसी को ‘अनुराग’ हो गया

  1. Madhyakaal me jab mahmood gajnavi ne mandiro ko toda to jnu ke vidwaan safai dete hai ki ye rajneeti se prerit kadam tha isme dharmik asahisnuta nahi thi.jab aurangjeb ne varanasi sahit des ke kai mandir tode to jnu ke vidwaan ye kahte hai ki mandir lootero , dakuo ka kendra ban gaya tha. Aaj jab jnu me ghatit durbhagyapurn ghatna ki pura desh ninda kar raha hai to kuch log ise ……..

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